बेहोशी के दिन

तुमने जितने दिये जहर , मैं पीता चला गया।एक वक्त था कि ,हर बात मानता चला गया ।तेरे शहर में आशियाना ना रहा कभी ।फिर भी मैं जानबूझकर कर , वही आता जाता रहा।मेरे दोस्तों ने लाख मनाही की थी मगर ।एक मैं था जो डूबता चला गया ।मेरे रूह तक को मालूम था ,मिलेगा […]

बेहोशी के दिन

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